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यूपी चुनाव में अखिलेश की हाहाकारी चाल, कांग्रेस में दूसरी कतार के नेताओं के चुनाव प्रचार को लेकर समाजवादी पार्टी ही राजी नहीं

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन हुआ तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तस्वीरों के साथ एक नारा दिखाई दिया गया जिसमें कहा गया था कि ‘यूपी को ये साथ पसंद है’। जाहिर है ये नारा समाजवादी पार्टी या फिर कांग्रेस के चुनाव रणनीतिकारों में से किसी एक के रचनात्मक दिमाग की उपज होगा और काफी सोच-विचार कर तैयार किया गया होगा। ये नारा प्रभावकारी भी दिखाई दे रहा है, लेकिन लगे हाथ समाजवादी पार्टी के नेता खुल कर तो नहीं लेकिन दबी जुबान से इस नारे में कुछ फेरबदल के साथ ये भी कह रहे हैं कि‘कांग्रेस से सोनिया-राहुल गांधी-प्रियंका के अलावा किसी और साथ पसंद नहीं है’।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की कांग्रेसियों के प्रति इस तरह की नापसंदगी खुल कर दिखाई भी दे रही है। कांग्रेस के लिए गांधी परिवार से उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी ही अभी तक अकेले मोर्चे पर डटे हुए हैं। प्रियंका और सोनिया गांधी के चुनाव प्रचार को लेकर अभी कुछ तय नहीं है। सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों से चुनाव प्रचार से दूर हैं वहीं प्रियंका संभवत: रणनीतिक कार्यों की व्यसस्तता और अपनी साख की फिक्र को लेकर प्रचार से दूर हैं क्योंकि इस बार अमेठी-रायबरेली में भी कांग्रेस की जीत पक्की नहीं दिखाई दे रही है। जहां तक राहुल की बात है तो वो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों के ही उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं लेकिन बताया जा रहा है कि उनके अलावा कांग्रेस में दूसरी कतार के नेताओं के चुनाव प्रचार को लेकर समाजवादी पार्टी ही राजी नहीं है।

समाजवादी पार्टी में उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि यूपीए सरकार में भ्रष्टाचार का मुद्दा अभी थमा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद से लेकर चुनावी सभाओं में यूपीए सरकार के समय हुए घोटालों को निशाना बना रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी निशाने पर हैं, इसलिए पार्टी ऐसे हालात में कोई जोखिम लेना नहीं चाहती। सत्ता से बाहर रहा गांधी परिवार निजी आरोपों से दूर है, इसीलिए वो तो चलेगा, लेकिन बाकी कांग्रेसी नेताओं से समाजवादी पार्टी दूरी बरत रही है। समाजवादी प्रियंका गांधी से प्रचार चाहती थी, बल्कि प्रचार के लिए प्रियंका के अभी तक नहीं उतरने से पार्टी में नाराजगी भी है। हालांकि समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल कहते हैं कि प्रियंका गांधी से चुनाव प्रचार करवाने का मामला कांग्रेस का अपना है, उसे इसके लिए बाध्य नहीं कर सकते।

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बहरहाल समाजवादी पार्टी के नेता इतनी रियायत जरूर बरत रहे हैं कि वो कांग्रेसी उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं, लेकिन अपने लिए उन्हें कांग्रेस के दूसरी कतार के नेताओं की जरा भी जरूरत नहीं है। यहां तक कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल और गुलाम नबी आजाद, सलमान खुर्शीद तक की समाजवादी पार्टी की ओर से कोई मांग नहीं है। पूर्व केंद्रीय मंत्रियों पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, जयराम रमेश, आनंद शर्मा, दिग्विजय सिंह, मनीष तिवारी जैसे नेताओं के प्रचार को लेकर भी सपा की तरफ से कोई मांग नहीं है, ये नेता कांग्रेसी उम्मीदवारों के लिए ही प्रचार कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेसी उम्मीदवार तक उनके प्रचार से बहुत उत्साहित नहीं हैं। यूपी के चुनावी समर में राहुल गांधी के बाद कांग्रेस की ओर से राज बब्बर ही चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा सक्रिय हैं, कांग्रेसी उम्मीदवार भी बाकी नेताओं की तुलना में उनसे प्रचार चाहते हैं क्योंकि बॉलीवुड से जुड़ा होने की वजह से उनके साथ ग्लैमर भी है।

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