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18 लाख खातों पर आयकर विभाग की नजर, ऐसे लोगों पर कभी भी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ संभव!

नई दिल्ली। काले धन के खिलाफ सरकार की सख्ती जारी है, सरकार ने इसीलिए देश में नोटबंदी जैसा सख्त कदम उठाया था। जो लोग सोच रहे हैं कि नोटबंदी के दौरान उन्होंने जो चालाकी दिखाई उससे वो बच जाएंगे तो ये उनकी गलतफहमी है। सरकार ने कहा है कि ऐसे 18 लाख लोगों की पहचान कर ली है, जिन्हें नोटबंदी का सरकारी फरमान जारी होने के बाद के सप्ताहों में किए गए बड़े कैश लेनदेन के स्रोत की जानकारी देनी होगी। यह कदम इनकम टैक्स विभाग के ऑपरेशन क्लीन मनी/स्वच्छ धन अभियान कार्यक्रम के तहत उठाया जाएगा। टैक्स डिपार्टमेंट ने ऐसे 18 लाख लोगों को इस आधार पर अलग से चिह्नित किया है कि इनके ट्रांजैक्शंस उनके टैक्स प्रोफाइल के मामलों से मेल नहीं खा रहे हैं।

आयकर विभाग ने इन 18 लाख लोगों के बैंक खातों तो जोखिम के स्वीकृत मानक के आधार पर वैरिफिकेशन के लिए चुना है, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखा है कि इस दौरान इन्हें किसी तरह की परेशानी ना हो। विभाग ने इन ट्रांजैक्शंस के ऑनलाइन वेरिफिकेशन की व्यवस्था की है ताकि लोगों को टैक्स अधिकारियों के हाथों किसी तरह की प्रताड़ना न झेलनी पड़े। हर पैन कार्डधारक इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल का इस्तेमाल करते हुए अपने ट्रांजैक्शन के बारे में जानकारी देख सकेगा। रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अधिया के मुताबिक ‘ऑपरेशन क्लीन मनी/स्वच्छ धन अभियान एक प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर है, जिसका इस्तेमाल सभी डिपॉजिट्स के बारे में जवाब हासिल करने में किया जाएगा और लोगों से शुरुआती जवाब मिलने के बाद ही जरूरी हुआ तो हम उन लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई करेंगे।’

इन 18 लाख लोगों को आयकर विभाग की ओर से मैसेज और ईमेल के जरिए भी सूचना देगा और उन लोगों को अपना जवाब इनकम टैक्स की वेवसाइटhttps://incometaxindiaefiling.gov.in पोर्टल पर 10 दिनों के भीतर ऑनलाइन देनी होगी। ऐसा न करने पर उन्हें टैक्स नोटिस जारी किए जाएंगे औरजरूरी कार्रवाई की जाएगी। सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्रा का कहना है कि ‘लोगों को अपने ट्रांजैक्शंस के बारे में सही जानकारी देनी चाहिए और बकाया टैक्स चुका देना चाहिए।’ शुरुआती चरण में विभाग ऐसे लोगों के बारे में जानकारी सामने रखेगा, जिन्होंने 5 लाख रुपये या इससे ज्यादा की रकम जमा की होगी या जिन्होंने 3 लाख से लेकर 5 लाख रुपये तक के संदिग्ध ट्रांजैक्शंस किए होंगे और टैक्स नियमों के पालन में गड़बड़ी की होगी।

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आयकर विभाग ने ऐसे लोगों को उन मामलों के आधार पर चुना है जिनमें इनके द्वारा जमा की गई रकम विभाग के पास मौजूद टैक्स प्रोफाइल से मैच नहीं कर रही है। सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्रा के मुताबिक सात हफ्तों के लिए खुली डिपॉजिट विंडो के दौरान एक करोड़ से ज्यादा खातों में 2 लाख रुपये से ज्यादा रकम कैश जमा की गई थी और इन खातों के साथ 70 लाख से ज्यादा पैन अटैच्ड हैं। आयकर विभाग अब इस पैसे के स्रोत के बारे में पूछ सकता है। नोटबंदी के 50 दिनों के दौरान ऐसी काफी शिकायतें आई थीं कि काला धन रखने वाले लोगों ने अपने पैसे को छिपाने के लिए अपने रिश्तेदारों और अन्य जानकारों के खातों में भारी मात्रा में पैसे जमा कराए।

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