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बैडमिंटन के बहाने अखिलेश दास ने करोड़ों लूटे

लखनऊ। अखिलेश दास गुप्ता की गिनती यूपी के बड़े काले कुबेरों में होती है। पूर्व बसपा सांसद गुप्ता के काले साम्राज्य पर लाख शिकायतों के बावजूद हाथ डालने की हिमाकत न ही ईडी में है और न ही सीबीआई में। लखनऊ के इन्डियन मर्केंटाइल बैंक में गुप्ता एन्ड कम्पनी ने हजारों करोड़ खुलेआम डकारे थे। अखिलेश दास के कुकर्मों की अंत कथा यही नहीं रूकती है। बात भारतीय बैडमिंटन संघ की करें तो यहाँ भी एक से बढ़कर एक घोटालों को अंजाम दिया गया है। लखनऊ से दिल्ली तक अखिलेश दास ने बैडमिंटन खेल को बेचा है।

दूसरे मायनों में कहें तो इन शीर्ष संघों पर अखिलेश दास गुप्ता की हिटलरशाही हुकुमत बरसों से चल रही है। बस जांच इसलिए नहीं होगी क्योंकि इस घोटालेबाज का रसूख बेहद तगड़ा ही नहीं है बल्कि खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तक गुप्ता के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। सबसे पहला मामला गोमतीनगर स्थित बैडमिंटन अकादमी का है। जिसे अब बैडमिंटन के लिए कम रईसों के शादीघर के तौर पर ख्याति अधिक मिल रही है। अवैध रूप से शादीघर बनी अकादमी पर एलडीए अफसर भी मेहरबान हैं और हों भी क्यों न जब अफसरों, नेताओं और रसूखदारों को उपकृत करने के लिए मुफ्त में आलीशान शादीघर दिया जाता रहा है।

खैर यूपी के बैडमिंटन संघ के भी मुखिया अखिलेश दास गुप्ता ही हैं, ताकि भारतीय बैडमिंटन संघ की तर्ज पर यहाँ भी करोड़ो  के हेरफेर को अंजाम दिया जा सके। यूपी के संघ में अखिलेश दास गुप्ता ने अपने उन करीबियों को सुनियोजित योजना के जरिये तैनात कर रखा है जो बीबीडी यूनिवर्सिटी में पहले से नियुक्ति पर हैं इन्हें हजारों से लेकर लाखों तक प्रतिमाह वेतन भी मिल रहा है। सबसे पहला नाम सुधरमा सिंह का है जो बीबीडी के रजिस्ट्रार थे लेकिन उन्हें यूपी बैडमिंटन संघ में कोषाध्यक्ष नियुक्त कर रखा गया है। जिससे पैसों को मनमाने तरीके से खर्च किया जा सके। लंबे समय से ये खेल चल भी रहा है। श्री सिंह को अखिलेश दास की तरफ से दो से तीन लाख प्रति माह वेतन भी दिया जाता है। अगला नम्बर उपाध्यक्ष अरुण कक्कड़ का है जो संघ में उपाध्यक्ष भी हैं लेकिन हैं बीबीडी के कर्मचारी।

इन्हें भी करीब 25 हजार मासिक पगार पर रखा गया है। सूची यहां नहीं थमी बल्कि अगला नम्बर ओएसडी राजेश सक्सेना का है जिन्हें 50 हजार महीना वेतन दिया जा रहा है जबकि ये भी बीबीडी के कर्मचारी हैं। अवैतनिक पदों पर वैतनिक पदाधिकारी रखने का  अधिकार चेयरमैन अखिलेश दास गुप्ता को किसने दिया ये तो वही बता सकते हैं लेकिन जिसने सिर्फ एक कोआपरेटिव बैंक में ही हजारों करोड़ का घोटाला अंजाम दे रखा हो उसके लिए ये बेहद छोटी बात है। सूत्रों की माने तो भारतीय बैडमिंटन संघ के खाते से भी अधिकांश पदाधिकारियों को अखिलेश दास गुप्ता उपकृत कर रहे हैं। बात अब भारतीय बैडमिंटन संघ की करी जाए जिसके मुखिया भी अखिलेश दास गुप्ता ही है।

गुप्ता ने अपने काले कारनामों में सहभागी न बनने पर यहाँ के जनरल सेकेट्री विजय सिन्हा को ही हटा दिया है। सिन्हा ने अखिलेश दास गुप्ता को पूरी तरह से  बेनकाब कर दिया है। सिन्हा ने एक लेटर जारी कर कहा है कि मुझे निकाला गया ताकि संघ के अध्यक्ष बिना रोकटोक के यहां के फंड का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकें। नवम्बर 2015 से दिसम्बर 2016 के बीच पिछले 13 महीनों में बैंक के आईबीएल- बीएआई खाते से करीब 36 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सवाल इस बात का है कि आखिर अखिलेश दास ने इतनी बड़ी रकम कहाँ खर्च की है। सिर्फ यही नहीं सबसे बड़ा खुलासा ये है कि जिस खाते से इतनी बड़ी रकम मनमाने तरीके से अखिलेश दास गुप्ता ने खर्च करवाई है।

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उस खाते की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज वीएन खरे को आॅर्बिटरटेर नियुक्त किया गया था ऐसे में आखिर बिना आॅर्बिटरटेर की सहमति के करोड़ों की भारी रकम कैसे फूंकी गयी है इसकी गहराई से जांच बेहद जरुरी है। विजय सिन्हा ने अखिलेश दास पर भाई-भतीजावाद करने का भी आरोप लगाते हुए कहा कि अध्यक्ष के बेटे यूपी ओलंपिक एसोसिएशन के संयुक्त सचिव और यूपी बैडमिंटन संघ में एसोसिएट वाइज प्रेजिडेंट के पद पर हैं।

उनकी बेटी को तनिक भी  बैडमिंटन का ज्ञान नहीं है, फिर भी अखिलेश दास गुप्ता ने मनमाने तरीके से अपने पद का दुरूपयोग करते हुए ट्रेनिंग के लिए जापान भेजा। स्पेन में बीडब्ल्यूएफ की मीटिंग के लिए भी गुप्ता ने सिन्हा से गुजारिश की थी कि वो किसी और को स्पेन जाने दें, वो भी सिर्फ इसलिए, क्योंकि हमेशा की तरह अखिलेश दास गुप्ता को किसी खास को उपकृत करना था इसी तरह भारतीय बैडमिंटन संघ का करोड़ों रूपए अखिलेश दास एन्ड कम्पनी ने हिटलरशाही की तर्ज पर खर्च करके एक बड़े घोटाले को अंजाम दिया है।

करीब तीस बच्चों को गलत तरीके से जापान भेजने के मामले की जांच होने की बात भी सामने आ रही है। अखिलेश दास गुप्ता को भारतीय बैडमिंटन संघ तक लाने में सिर्फ विजय सिन्हा का ही हाथ था लेकिन आज उन्होंने सिन्हा को ही किनारे लगवा दिया। भारतीय बैडमिंटन संघ के बैंक खाते पीएनबी और सेन्ट्रल बैंक में बताये जा रहे हैं इन खातों की सघन जांच होने से अखिलेश दास गुप्ता के बेहिसाब घोटाले सामने आ सकते हैं।

यही नहीं ईडी और सीबीआई को अखिलेश दास गुप्ता द्वारा इन्डियन मर्केंटाइल बैंक में की गयी हजारों करोड़ की मनीलांड्रिंग की भी जांच करनी चाहिए लेकिन ऐसे बड़े कालेकुबेरों के खिलाफ भाजपा सरकार इसलिए कार्रवाई नहीं करती क्योंकि ऐसे भ्रष्ट चाल-चरित्र-चिंतन वाली पार्टी की ही छाँव में पल रहे हैं तभी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अखिलेश दास गुप्ता की बीबीडी यूनिवर्सिटी में गए थे अब ये घोटालेबाज भाजपा में शरण पाने की फिराक में लग रहा है।

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