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साल के पहले ‘मन की बात’ में पीएम ने छात्रों को दिया ‘स्माइल मोर, स्कोर मोर’ का मंत्र

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देशवासियों के साथ ‘मन की बात’ की। साल 2017 में यह प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ का पहला संस्करण था। प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में हिमस्खलन में जान गंवाने वाले जवानों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ वीरता पुरस्कार से सम्मानित होने वाले सैन्यकर्मियों और उनके परिवार को बधाई दी। उन्होंने 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्य तिथि के मौके पर सुबह 11 बजे 2 मिनट का मौन रखकर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देने की अपील की। पीएम का इस बार का ‘मन की बात’ पूरी तरह परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्रों और उनके अभिभावकों पर केंद्रित था।

वैसे तो प्रधानमंत्री मोदी ‘मन की बात’ से राजनीति से जुड़ी बातें कम ही करते हैं, लेकिन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चुनाव आचार संहिता को देखते इस बार पूरी तरह गैर राजनीतिक मुद्दों पर बात की। प्रधानमंत्री ने परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्रों और उनके अभिभावकों से कहा कि हर साल तीन-चार महीनों को उत्सव में बदलें। उन्होंने कहा कि परिवार भी छात्रों का साथ दें।

‘स्माइल मोर, स्कोर मोर’
प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों को परीक्षा को लेकर तनाव नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेमोरी बढ़ाने की सबसे बड़ी औषधि रिलैक्स होना है। रिलैक्स होने से मेमोरी वापस आती है। पीएम ने छात्रों को ‘स्माइल मोर, स्कोर मोर’ का मंत्र दिया।

‘परीक्षा जीवन-मरण का प्रश्न नहीं’
पीएम ने कहा कि कभी-कभी हम परीक्षा को सही परिप्रेक्ष्य में देख नहीं पाते, ऐसा लगता है जैसे इसे जीवन-मरण का प्रश्न बना लिया जाता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा को सफलता-विफलता से नहीं जोड़ना चाहिए। पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन के नाम से मशहूर अब्दुल कलाम का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि कलाम साहब वायुसेना में भर्ती होने गए मगर फेल हो गए। अगर वह उस नाकामी से हार मान जाते तो क्या भारत को इतना बड़ा वैज्ञानिक मिलता।

‘मार्क्स नहीं नॉलेज काम आता है’
मन की बात में प्रधानमंत्री ने छात्रों को मार्क्स के पीछे न भागने सलाह दी। उन्होंने कहा कि मार्क्स के पीछे भागने की जरूरत नहीं है। जीवन में स्किल और नॉलेज काम आएगा। पीएम मोदी ने पूछा कि क्या डॉक्टर के पास जाते वक्त उसकी मार्कशीट देखते हैं? लोग डॉक्टर का अनुभव और ज्ञान देखते हैं। उन्होंने कहा कि मैं यह भी नहीं कह रहा हूं कि पढ़ना जरूरी नहीं है। पीएम मोदी ने कहा कि अगर अंक के पीछे पड़ गए तो शॉर्ट कट अपनाएंगे। अंक के पीछे पड़ने से आप सिकुड़ जाते हैं जबकि ज्ञान पर फोकस करेंगे तो फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि शॉर्ट कट वाले रास्ते नकल के कारण बन जाते हैं।

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‘प्रतिस्पर्धा नहीं अनुस्पर्धा अपनाएं’
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को सलाह दी कि प्रतिस्पर्धा नहीं अनुस्पर्धा अपनाएं यानी स्वयं से स्पर्धा करना, बीते हुए कल से आज को बेहतर बनाना सीखें। उन्होंने कहा कि ज्यादातर सफल खिलाड़ी अनुस्पर्धा करते हैं। सचिन को ही देख लें, 20 साल तक अनुस्पर्धा करते रहे, अपने ही रेकॉर्ड को तोड़कर नया रेकॉर्ड बनाते रहे। उन्होंने कहा कि खुद को ही कसौटी पर तौलिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रतिस्पर्धा में पराजय निराशा को जन्म देता है जबकि अनुस्पर्धा में आत्मचिंतन को।

‘स्वीकारें, सिखाएं और समय दें’
प्रधानमंत्री ने कहा कि अभिभावकों को तीन चीजों पर जोर देना चाहिए- स्वीकारना, सिखाना और समय देना। उन्होंने कहा कि जैसे है उसे वैसा ही स्वीकार कीजिए। उन्होंने कहा कि अपेक्षाएं राह कठिन करती हैं, अवस्था को स्वीकार करना नए रास्ते देते हैं। इसलिए जो है उसे स्वीकार कीजिए, स्वीकार करेंगे तो बोझमुक्त हो जाएंगे।

‘जो खेले वह खिले’
प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि किताबों के बाहर भी जिंदगी होती है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ खेलकूद भी जरूरी है। पीएम ने सफलता के लिए आराम, नींद और खेलकूद को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि जो खेलता है वही चमकता है, जो खेलता है वह खिलता है। उन्होंने छात्रों को परीक्षा के तनाव से मुक्त होने के लिए गहरी सांस लेने की सलाह दी।

कोस्ट गार्ड के 40 साल पर बधाई
प्रधानमंत्री ने भारतीय कोस्ट गार्ड के 40 साल होने पर कोस्ट कार्ड के सभी जवानों और अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि 1 फरवरी 2017 को भारतीय कोस्ट गार्ड के 40 साल पूरे हो रहे हैं। पीएम ने कहा कि भारतीय कोस्ट गार्ड विश्व के सबसे बड़े 4 कोस्ट गार्ड्स में से एक है। इसमें पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी हैं, जो गर्व की बात है।

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