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फैसले के बाद पिता से मिलने पहुंचे अखिलेश यादव

लखनऊ। अखिलेश यादव ने पिता मुलायम को हराकर समाजवादी पार्टी और साइकिल चुनाव चिन्ह पर कब्जा कर लिया है. मुलायम सिम्बल की लड़ाई हार गये हैं. अब अखिलेश का मतलब ही समाजवादी पार्टी है. एक जनवरी को अखिलेश को अध्यक्ष बनाने के बाद झगड़ा चुनाव आयोग पहुंच गया था.

‘साइकिल’ चुनाव निशान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मिल गया. चुनाव आयोग ने अभी यह फैसला सुनाया है. उत्तर प्रदेश में पहले चरण की चुनावी प्रक्रिया के तहत नामांकन दाखिल करने में काफी कम समय बचा है ऐसे में यह फैसला अखिलेश यादव के लिए बेहद राहत की खबर है. यह फैसला मुलायम सिंह यादव के लिए बड़ा झटका है. राज्य में सात चरणों में मतदान होंगे. मतदान 11 फरवरी से शुरू होगा.

  • प्रमोद तिवारी ने कहा, ”चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करना चाहिए. ये समाजवादी पार्टी और परिवार का अंदरूनी मसला है. गंठबंधन को लेकर मैं कुछ नहीं कह सकता. ये पार्टी के बड़े नेता गुलाम नबी आजाद और राजब्बर तय करेंगे.”
  • चुनाव आयोग में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की लड़ाई पर एबीपी न्यूज़ बड़ा खुलासा कर रहा है. साइकिल निशान के लिए मुलायम सिंह यादव ने अपनी ओर से चुनाव आयोग के मांगने पर हलफनामा दिया ही नहीं. एक हलफनामा मुलायम की ओर से दिया गया. इसके बाद न तो शिवपाल यादव ने, न ही अमर सिंह ने मुलायम के लिए हलफनामा पेश किया. साइकिल निशान के लिए अखिलेश ने 4 हजार 716 हलफनामा पेश किए जिससे साफ था कि पार्टी पर अखिलेश की जबर्दस्त पकड़ बनी हुई है.अखिलेश के समर्थन में 228 में से 205 विधायकों ने, 68 में से 56 विधान पार्षदों ने, 24 में से 15 सांसदों ने, 46 में से 28 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों ने, 5731 में से 4400 प्रतिनिधियों ने अखिलेश के समर्थन में हलफनामा दिया जिससे पार्टी पर अखिलेश का दबदबा चुनाव आयोग में साबित हुआ.
  • आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने एक के बाद एक ट्वीट कर अखिलेश को बधाई दी.
  • रीता बहुगुणा जोशी ने कहा, ”ये पार्टी के अंदर की लड़ाई थी. परिवार की लड़ाई थी. समाजवादी पार्टी की सरकार की बारी अब जवाब देने की है. हम खुश हैं कि जो सरकार में बैठे हैं उनके पक्ष में फैसला आया. अब सरकार का मूल्यांकन होगा.”
  • कांग्रेस के साथ गठबंधन पर रामगोपाल यादव ने कहा, ”उम्मीद है.”
  • रामगोपाल यादव ने एबीपी न्यूज़ ने कहा, ”मैं चुनाव आयोग को बधाई देना चाहूंगा. आयोग ने बहुत सही और न्यायसंगत फैसला दिया है. देश में जहां भी समाजवादी पार्टी है सभी अखिलेश के पक्ष में हैं. इससे साफ हो गया है कि अखिलेश एक बार फिर सीएम बनेंगे. जब तक चुनाव हैं तब तक मुलायम सिंह के बारे में कुछ नहीं बोलूंगा. हमारे बीच फूट थी इसीलिए चुनाव आयोग में दो गुट बैठे थे. नेता जी को इस वजह से कुछ समझ नहीं आया क्योंकि कुछ ऐसे लोग उनके साथ हैं जो पार्टी को बर्बाद करना चाहते हैं. मेरी मुख्यमंत्री से बात हुई है, वे बहुत खुश हैं.”
  • फैसले के बाद अखिलेश यादव पिता मुलायम सिंह यादव से मिलने और उनका आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं. अखिलेश के बाद शिवपाल यादव भी उनके घर पहुंचे हैं.

कैसे हुआ फैसला

यूपी में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी में चुनाव चिह्न विवाद पर चुनाव आयोग ने आज अंतरिम आदेश पारित कर दिया है. अखिलेश यादव को पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह दोनों मिल गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी की अगुवाई में आयोग ने शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं और अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. आयोग आज आदेश पारित कर दिया है.

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चुनाव आयोग ने 9 तारीख तक दोनों पक्ष से हलफनामे के जरिए ये बताने को कहा था कि किस पक्ष के पास कितने विधायकों का समर्थन है ? दोनों पक्षों के इन्हीं हलफनामों का अध्ययन करने के बाद चुनाव आयोग ने 50%+1 के आधार पर अखिलेश को पार्टी और चुनाव निशान साइकिल दिया है. अखिलेश यादव को इस बात की जानकारी दे दी गई है.

आपको बता दें दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुलायम सिंह से पूछा था कि क्या आपकी पार्टी में कोई टूट है तो मुलायम ने कहा था कि नहीं कोई टूट नहीं है. इस पर जब चुनाव आयोग ने पूछा था कि अगर कोई टूट नहीं है तो फिर साइकिल निशान किसे दिया जाए. इस पर मुलायम ने कहा था कि हमें दिया जाए. इसी बात पर चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों में फूट की बात मानी थी.

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