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‘साइकल’ के दंगल पर आज चुनाव आयोग सुना सकता है फैसला

लखनऊ। समाजवादी पार्टी में जारी घमासान के बीच साइकल चुनाव चिह्न मुलायम या अखिलेश गुट में किसका होगा, इस बात का फैसला कुछ ही देर में चुनाव आयोग कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोपहर साढ़े 12 बजे के करीब आयोग इन दोनों गुटों की सुनवाई शुरू करेगा। बता दें कि समाजवादी पार्टी के दोनों गुट ने खुद को असली समाजवादी पार्टी बताते हुए साइकल सिंबल पर अपना दावा ठोंका है। अखिलेश कैंप दोपहर 12 बजे के करीब चुनाव आयोग पहुंच गया। सूत्रों के मुताबिक, पहले नरम दिखा रहा मुलायम खेमा अब साइकल चिह्न पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है।

क्या ऑप्शन बाकी
चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है और इसलिए चुनाव आयोग के पास वक्त बहुत कम बचा है। ऐसे में चुनाव चिह्न पर जल्द फैसला करना चुनाव आयोग की मजबूरी है। हो सकता है कि दोनों गुट अपने दावे पेश करें और आयोग कोई फैसला दे दे हालांकि आयोग आज ही कोई फैसला लेगा, इस पर संदेह है। अगर चुनाव आयोग में तत्काल फैसला नहीं हो पाता है तो दोनों गुटों को अलग-अलग सिंबल आवंटित हो जाएगा जिस पर वह अभी चुनाव लड़ेंगे। चुनाव आयोग के सामने तीसरा विकल्प तब होगा अगर कोई गुट अपना दावा वापस ले लेता है। इस स्थिति में विवाद खत्म हो जाएगा और आयोग कुछ नहीं करेगा। अगर साइकल सिंबल पर दावा छोड़कर कोई गुट अपनी पार्टी बनाता है तब भी आयोग के लिए फैसला करना आसान होगा।

अंतिम समय तक सुलह की कोशिशें
चुनाव आयोग में आज होने वाले फैसले से पहले दोनों गुट ने रणनीति पर काम करने के लिए गुरुवार को पूरे दिन कानूनी राय ली। अखिलेश गुट की ओर से रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वहीं मुलायम सिंह गुट की ओर से इसकी जिम्मेदारी अमर सिंह और शिवपाल सिंह यादव उठा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को भी दोनों गुट के बीच समझौते की कोशिश जारी रही। सूत्रों के अनुसार, अंतिम समय में दोनों गुटों को आपस में बातकर आयोग से आवेदन वापस लेने का आग्रह किया गया। दोनों गुटों के बीच बहुत सकारात्मक बातचीत हुई और कोई ठोस नतीजा निकलने के आसार हैं। अंतिम समय में यह रणनीति बनी कि आयोग से 3-4 दिनों का समय लेकर समझौते के लिए वक्त मांग लें और इस बीच दोनों गुट कोई आम समझौता प्लान तैयार कर लें। गौरतलब है कि यूपी विधानसभा चुनाव में पहले चरण के लिए 17 जनवरी से नॉमिनेशन की प्रक्रिया शुरू होगी।

दोनों खेमों के दावे
चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया, चुनाव आयोग सावधानीपूर्वक पार्टी के नियमों के मुताबिक रामगोपाल यादव की अध्यक्षता में अखिलेश द्वारा बुलाए गए अधिवेशन की वैधता की जांच कर रहा है। लखनऊ में अधिवेशन के दौरान अखिलेश ने तीन प्रस्ताव पारित किए थे जिसमें मुलायम को मार्गदर्शक और अखिलेश को पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया था। अखिलेश के विरोधी खेमे का कहना है कि मुलायम को नोटिस दिए जाने के बाद ही उनके पद से हटाया जा सकता है जबकि अखिलेश ने ऐसा नहीं किया। मुलायम सिंह का दावा है कि रामगोपाल यादव को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था और इसलिए उनके पास अधिवेशन बुलाने का कोई अधिकार नहीं था।

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क्या साइकल फ्रीज हो जाएगी?
यादव परिवार में जारी लड़ाई में अब जिस सवाल का जवाब पाने को सबसे ज्यादा उत्सुकता दिखाई पड़ रही है, वह यह है कि क्या समाजवादी पार्टी का नाम और निशान बचा रहेगा या उसे फ्रीज कर दिया जाएगा? पार्टी के दो धड़ों में जारी विवाद में जब तक चुनाव आयोग इस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाता है कि किसे असली पार्टी माना जाए, तब तक उसके पास नाम और निशान को जब्त कर लेने का विकल्प बचता है। दरअसल, समाजवादी पार्टी के नाम और निशान को लेकर विवाद पहली बार नहीं हो रहा है। अतीत में कई मौकों पर इस तरह के विवाद सामने आए हैं और विवादों के चलते कई निशान और पार्टियों के नाम अतीत का हिस्सा बन चुके हैं। अब साइकल चलती है या जाम हो जाती है, इसका फैसला चुनाव आयोग ही
करेगा।

टिकी हैं कांग्रेस की भी नजरें
‘साइकल’ के लिए मुलायम-अखिलेश की दावेदारी पर चुनाव आयोग के फैसले पर जितनी समाजवादी पार्टी की नजर होगी, उतनी ही कांग्रेस की। आयोग के फैसले के आधार पर कांग्रेस के हिस्से आने वाली सीटों पर मोलभाव होगा। सूत्र बताते हैं कि अगर ‘साइकल’ फ्रीज होती है तो कांग्रेस एसपी से ज्यादा सीटें मांगेगी। सूत्रों का दावा है कि आयोग के फैसले के बाद ही सीटों की सटीक संख्या तय होगी। गुरुवार को कई चरणों में नेताओं के साथ बातचीत में इस बात पर भी चर्चा हुई कि ‘बिना साइकल’ अखिलेश के साथ गठबंधन कितना फादेमंद होगा। इस मसले पर राहुल-प्रियंका पहले भी बात कर चुके हैं। प्रशांत किशोर के मुताबिक यूपी चुनाव में ‘ब्रैंड अखिलेश’ पर दांव लगाया जा सकता है। पीके की तरफ से आए इस सुझाव के बाद गुरुवार को इसपर चर्चा हुई। इसमें यह तय किया गया है कि शुक्रवार को आयोग के फैसले के बाद सीटों की संख्या पर कुछ तोड़ किया जा सकता है।

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