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अग्नि-4 से बौखलाए चीन के मीडिया ने कहा, हम कर सकते हैं पाकिस्तान की मदद

पेइचिंग। भारत द्वारा लंबी दूरी के बलिस्टिक मिसाइलों को विकसित करने और उनका परीक्षण करने से चीन भड़का हुआ है। अपनी खीझ उतारने और भारत को दोतरफा घेरने के लिए चीन ऐसे ही मिसाइल विकसित करने में पाकिस्तान की मदद कर सकता है। चीन ने संकेत दिया है कि अगर भारत अपने सामरिक बेड़े में लंबी दूरी के मिसाइलों की संख्या बढ़ाता है, तो चीन ऐसे मिसाइल्स विकसित करने में अपने ‘पुराने और भरोसेमंद दोस्त’ पाकिस्तान की मदद करेगा। यह दावा चीन की मीडिया में किया गया है। सोमवार को ही भारत ने 4,000 किलोमीटर की दूरी तक वार करने वाले अंतरमहाद्वीपीय बलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का निर्णायक परीक्षण किया था।

चीन की सरकार द्वारा चलाए जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है, ‘अगर लंबी दूरी के इन अंतरमहाद्वीपीय बलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को कोई आपत्ति नहीं है, तो ठीक है। पाकिस्तान के परमाणु क्षमता संपन्न मिसाइलों की संख्या भी बढ़ेगी।’ अखबार ने संकेत दिया है कि चीन ऐसे मिसाइल विकसित करने में पाकिस्तान की मदद करेगा।

चीन की सरकार अपने विचार को दुनिया के सामने रखने के लिए अक्सर ही मीडिया का इस्तेमाल करती है। कूटनीतिक स्तर पर जो बातें सरकार खुलकर नहीं कह सकती, ऐसी बातें और विचार सामने रखने के लिए चीन की सरकार अपनी मीडिया का सहारा लेती है। ग्लोबल टाइम्स का संपादकीय इसी लिहाज से लिखा गया लगता है। इसमें पाकिस्तान की वकालत करते हुए कहा गया है कि पाक को भी भारत के ही बराबर परमाणु सुविधाएं और विशेषाधिकार मिलने चाहिए। इस संपादकीय लेख में कहा गया है. ‘अगर पश्चिमी देश भारत तो परमाणु शक्ति संपन्न देश के तौर पर स्वीकार करते हैं और भारत और पाकिस्तान के बीच की परमाणु होड़ से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, तो चीन भी इससे अलग नहीं रहेगा। मौजूदा समय में भारत की ही तरह पाकिस्तान को भी अपनी परमाणु क्षमता विकसित करने का अधिकार मिलना चाहिए।’

इस संपादकीय लेख में एक तरफ तो यह लिखा गया है कि भारत द्वारा परमाणु क्षमता संपन्न अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलों के परीक्षणों से चीन परेशान नहीं है, लेकिन दूसरी तरफ इसमें यह भी कहा गया है अग्नि 4 के परीक्षण से चीन बेचैन है। संपदकीय में लिखा गया है, ‘हमें नहीं लगता है कि भारत के विकास से चीन को किसी तरह का खतरा है। आगे आने वाले समय में भारत को चीन का मुख्य प्रतियोगी नहीं माना जाएगा, लेकिन अगर भारत बहुत आगे बढ़ता है तो चीन चुप नहीं रहेगा। भारत जानता है कि अगर उसकी भौगोलिक-राजनैतिक तरकीबों से चीन के साथ उसके रिश्ते बिगड़ते हैं, तो इससे उसका ही नुकसान होगा।’

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इन बातों के अलावा इस संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि ‘भारत ने संयुक्त राष्ट्रसंघ की सीमाओं’ का उल्लंघन किया है। आरोप लगाया गया है कि UN द्वारा परमाणु हथियारों और लंबी दूरी के बलिस्टिक मिसाइल्स की संख्या को लेकर तय की गई सीमा का भारत ने उल्लंघन किया है। इसमें आगे कहा गया है, ‘अमेरिका और कुछ अन्य पश्चिमी देशों ने भी भारत की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अपने नियम लचीले कर दिए हैं। भारत अपनी मौजूदा परमाणु क्षमताओं से संतुष्ट नहीं है और वह ऐसे अंतरमहाद्वीपीय बलिस्टिक मिसाइल्स विकसित करने की कोशिश कर रहा है जो कि दुनिया के किसी भी देश को निशाना बना सकें। इसके बाद भारत सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों के बराबर वाली जगह पर खुद को पेश करेगा।’

सोमवार को भारत ने अग्नि-4 का सफल निर्णायक परीक्षण किया। यह मिसाइल 4,000 किलोमीटर की दूरी तक वार कर सकता है। इससे पहले पिछले हफ्ते ही भारत ने अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया था, जो कि 5,000 किलोमीटर तक वार कर सकता है। इस मिसाइल के साथ ही यूरोप और चीन के सुदूर उत्तरी इलाके भी भारत की पहुंच के भीतर आ गए हैं।

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