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EC ने मुलायम-अखिलेश से पूछा, पार्टी किसकी

लखनऊ। समाजवादी पार्टी और चुनाव चिह्न ‘साइकल’ को लेकर मुलायम सिंह यादव और अखिलेश के दावे पर चुनाव आयोग ने दोनों को नोटिस जारी किया है। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक दोनों ही पक्षों को 9 जनवरी तक जवाब देने को कहा गया है। हालांकि, इस विवाद पर फैसले में कुछ महीने का समय लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में यदि चुनाव आयोग किसी एक पक्ष को चिह्न देने के फैसले पर नहीं पहुंच पाता है तो वह इसपर रोक लगा सकता है ताकि चुनावों के दौरान किसी पक्ष को अतिरिक्त लाभ न हो। इस बीच कुछ टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक मुलामय सिंह यादव और शिवपाल यादव दिल्ली आ रहे हैं और चुनाव आयोग जा सकते हैं।

चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने बुधवार को 5 राज्यों में चुनाव की घोषणा करते हुए मीडिया से कहा था कि, चुनाव निशान संबंधी प्रावधान के अनुसार आयोग अब तक की परिपाटी और स्थापित सिद्धातों को ध्यान में रखते हुए अपने सामने आए दस्तावेजों की छानबीन करेगा और सही समय पर उचित फैसला करेगा।

आयोग ने कहा कि इस विवाद को लेकर चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश-1968 के पैरा 15 के मुताबिक फैसला किया जाएगा, जो आयोग को मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों के अलग हो गए समूहों या विरोधी समूहों के संदर्भ में फैसला करने का अधिकार देता है। जैदी ने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों में चुनाव आयोग को मुलायम सिंह यादव से एक प्रतिवेदन मिला और दूसरा प्रतिवेदन राम गोपाल यादव और अखिलेश यादव की तरफ से मिला।

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सपा में चल रहा घमासान उस वक्त चुनाव आयोग की चौखट तक पहुंच गया जब एक जनवरी को लखनऊ में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाले धड़े की ओर से बुलाई गई अधिवेशन में अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। अखिलेश गुट का कहना है कि पार्टी का नेतृत्व अब मुलायम नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कर रहे हैं।

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