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सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए मिली जमीनों का व्यवसायिक इस्तेमाल कर रहे कलाकार

ajivasanमुंबई। महाराष्ट्र सरकार अभी भी सांस्कृतिक गतिविधियों के नाम पर कलाकारों को बेहद कम दामों पर जमीन लीज पर दे रही है। बेहतर होगा कि सरकार इस बात का भी ध्यान रखे कि क्या पूर्व में दी गई जमीनों का सही इस्तेमाल हो रहा है नहीं।

हेमा मालिनी को हाल ही में अंधेरी में एक क्ल्चरल कॉम्प्लेक्स (सांस्कृतिक भवन) कौड़ी के दामों में दिया गया है। हालांकि, इससे पहले भी कई कलाकारों को सरकार सांस्कृतिक गतिविधियों के नाम पर न के बराबर दामों में जमीन दे चुकी है, जिनमें सुरेश वाडकर और हरीप्रसाद चौरसिया भी शामिल हैं।

दोनों ही कलाकारों को 1976 के अनुमानित दामों के मात्र 25 प्रतिशत दाम पर जमीनें दे दी गईं। ऐसा 1983 में आए, ट्रस्टों को शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जमीन मुहैया कराने के संकल्प के तहत किया गया। इन दोनों ही कलाकारों को 90 के दशक के दौरान पश्चिमी उपनगरों में जमीनें दी गईं।

तफ्तीश के बाद पता चला कि दिए गए प्लॉट्स पर जो इमारतें बनी हैं, उनका इस्तेमाल आम तौर पर व्यवसायिक गतिविधियों या फिर छुट्टियां मनाने के स्थान के रूप में हो रहा है, जबकि सांस्कृतिक गतिविधियां तो बस नाम मात्र की हैं। जबकि, नियम बिल्कुल स्पष्ट हैं कि इन प्लॉट्स का इस्तेमाल व्यवसायिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता और न ही इन्हें किराए पर चढ़ाया जा सकता है।

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1992 में सुरेश वाडकर जी को जुहू में लीडो सिनेमा के सामने 1.600 स्क्वेयर मीटर का प्लॉट 99 सालों की लीज पर दिया गया था। दरअसल यह प्लॉट उन्हें अजीवासन रेसीडेन्शियल संगीत गुरुकुल चलाने के लिए दिया गया था लेकिन उन्होंने इसे तीन विवाह स्थलों को किराए पर दे दिया। इन तीनों की क्षमता 300, 500 और 1000 आदमियों की है। साथ ही उन्होंने एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो के लिए भी जमीन किराए पर दे रखी है। उन्होंने बिल्लाबॉन्ग स्कूल को भी जमीन लीज पर दे रखी है जबकि उनका पूरा परिवार चौथे माले पर रहता है।

असल उद्देश्य के प्रति औपचारिकता मात्र निभाई जा रही है। ‘अजीवासन’ में हर हफ्ते सिर्फ कुछ घंटों की संगीत कक्षाएं लगती हैं।

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