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LDA के संयुक्त सचिव नरेंद्र नारायण सिंह के आगे VC की भी नहीं चलती

ldaldaलखनऊ। देश में भले ही नोटबंदी रही हो, लेकिन उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े भ्रष्टाचार के अड्डे वाले सूबे के लखनऊ विकास प्राधिकरण में इसका कोई असर नहीं दिखाई पद रहा है. जिसके चलते प्राधिकरण में ब्रोकरों के जरिये एक संयुक्त सचिव ने कई योजनाओं में रिक्त पड़ी संपत्तियों के निस्तारण की नीलामी कर एक तीर से दो निशाने लगाकर वावाही लौट ली है.

सूत्रों के मुताबिक प्राधिकरण में तैनात संयुक्त सचिव नरेन्द्र नारायण सिंह का इन दिनों विभाग में एक तरफ़ा सिक्का चलता हुआ दिखाई दे रहा है. बताया जाता है कि कहने को तो प्राधिकरण में नरेन्द्र नारायण के ऊपर भी कई बड़े अफसर बैठे हैं. लेकिन हकीकत यह है कि इस अफसर के आगे वर्तमान में सब नतमस्तक हैं. दरअसल जोड़तोड़ बैठाने में माहिर नरेन्द्र नारायण सिंह ने सपा मुखिया कि पत्नी साधना गुप्ता के जरिये प्राधिकरण कि मलाईदार योजनाओं को हथिया लिया है. जिसके चलते उनकी पांचों अंगुलियां इन दिनों घी में डूबी हुई हैं.

सूत्रों के मुताबिक प्राधिकरण में समायोजन के नाम पर जमकर खेल किया जा रहा है. बताया जाता है कि पुराने पंजीकरण बेचने वाले दलालों से पंजीकरण पहले ख़रीदे जा रहे हैं. उसके बाद उन्हें पुनर्जीवित कर अन्य योजना से स्थानांतरित कर गोमतीनगर फेज-2 आवंटित किया जा रहा है. बताया जाता है कि प्रधिकरण में इस घोटाले को अंजाम देने लिए निलंबित चल रहे बाबुओं को अपने साथ मिलकर यह काम करवाये जा रहे हैं. यहां तक कि हाल में नोटबंदी के दौरान प्राधिकरण कि रिक्त पड़ी संपत्तियों का आवंटन कई दलालों से भारी रकम लेकर उनके चहेतों को आवंटित कर दी गयी.

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सूत्रों के मुताबिक इसके चलते प्राधिकरण को लाखों रुपये कि आर्थिक क्षति पहुंची है. बताया जाता है कि नोटबंदी के दौरान बेचीं गयीं इन संपत्तियों की नीलामी से पहले ही ये बात तय हो चुका था कि कौन- कौन से दलालों को कहां पर संपत्तियों का आवंटन किया जाना है. बाद में नीलामी कर चहेते दलालों से मोती रकम लेकर प्राधिकरण की खली पड़ी संपत्तियों का निस्तारण कर 101 करोड़ रुपये की संपत्तियों को बेच दिया गया.

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