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चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने इन्हें दी बंपर तोहफों की सौगात

akhilesh-yadav13लखनऊ। उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सूबे के करीब 25 लाख सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनरों को सातवें वेतनमान का तोहफा दिया है। जनवरी 2017 से सातवें वेतनमान की सिफारिशों के लागू होने से कर्मचारियों के वेतन में 20 फीसदी तक का इजाफा होगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में हुई कैबिनेट मीटिंग में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। केन्द्र सरकर की ओर से सांतवा वेतन माद दिए जाने के बाद सरकार ने राज्य कर्मचारियों के वेतन भत्ते के सम्बन्ध में जी बी पटनायक आयोग का गठन किया था।
आयोग ने वेतन भत्तों में 20 फीसदी तक इजाफे की सिफारिश की थी। प्रदेश में सातवां वेतन आयोग लागू होने से कर्मचारियों के वेतन 20 फीसदी की वृद्धि होगी। यदि किसी कर्मचारी की 25000 रूपए प्रतिमाह वेतन मिलता है तो सातवां वेतन लागू होने के बाद उसे 30000 रूपए मिलेंगे। इस हिसाब से उसे एक वर्ष में उसे 60000 रूपए का फायदा होगा।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने पर सरकारी खजाने पर करीब 24 हजार करोड रुपए का अतिरिक्त व्ययभार बढेगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार कर्मचारियों को उनका हक दिलाने के लिए कृतसंकल्प है इसीलिये पटनायक आयोग का गठन किया गया था।
नोटबंदी पर उन्होंने कहा कि ‘नोटबंदी मेरे ही नहीं पूरे देश के खिलाफ जबरदस्त साजिश है। पूरा देश आज लाइन में खड़ा हुआ है। किसान बरबाद हो गए हैं। बाहर काम करने वाले हजारों लोग अपने घरों को लौट रहे हैं। अब ‘कैशलेस’ अर्थव्यवस्था की बात की जा रही है। वह केन्द्र सरकार से जानना चाहते हैं कि नोटबंदी और कैशलेस व्यवस्था के लिए क्या तैयारी की है।
यादव ने कहा कि कालाधन खत्म हो यह सभी चाहते हैं लेकिन बिना तैयारी के योजना लागू करने से जनता को परेशानी में झोंक दिया गया। बैंकों और एटीएम में लगी लाइन कम होने की बजाए बढती जा रही है। सर्दी और कोहरे में भी लोग लम्बी लाइन में लगे हैं। गांव में तो पैसा ठीक से पहुंच ही नहीं पा रहा है। किसान काफी तकलीफ से गुजर रहा है। पचास दिन का समय मांगा गया था लेकिन दुश्वारियां खत्म होने में छह माह से एक साल तक लग सकता है।
उन्होंने कहा कि नोटबंदी की वजह से अर्थव्यवस्था पीछे चली गयी है। कहीं काम नहीं रह गया है। जनता इसका सटीक जवाब चुनाव मे देगी। कालाधन तो समाप्त होना ही चाहिए लेकिन यह सरकार का काम है कि इसके लिए किए जाने वाले उपायों से सामान्य जनता को कोई दिक्कत न हो।
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