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चीन पर नजर, दो दिवसीय मॉरीशस दौरे पर जाएंगे रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर

indian-oceanनई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल के मद्देनजर भारत ने अपनी रणनीतिक तैयारी तेज कर दी है। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर इस सिलसिले में शनिवार से मॉरीशस की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा पर दोनों देशों के रक्षा संबंधों में और मजबूती लाने की कोशिश होगी। रणनीतिक जानकारों का कहना है कि जिस देश का हिंद महासागर पर ज्यादा कंट्रोल होगा, वह एशिया में राज करेगा।

चीन ने हाल के वर्षों में हिंद महासागर से जुड़े देशों में भारी रकम का निवेश किया है। इस इलाके में भारत की रणनीतिक मजबूती के लिहाज से मॉरीशस से दोस्ती जरूरी है। भारत के एनर्जी का 70 फीसदी हिस्सा उस समुद्री रूट से आता है, जहां मॉरिशस की लोकेशन अहम है। यह समुद्री रूट डाकुओं और आतंकवादियों के कहर से अछूता नहीं है।

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भारत ने मॉरिशस के साथ प्रगाढ़ रक्षा संबंध कायम कर रखा है। भारतीय नेवी के शिप वहां इकनॉमिक जोन की गश्त करते हैं। हेलिकॉप्टर, गश्ती जहाज और सर्विलांस सिस्टम की भी मदद भारत ने दी है। मॉरीशस पुलिस के जवान भारतीय रक्षा प्रशिक्षण संस्थानों में ट्रेनिंग लेते हैं। मॉरीशस को भारत अफ्रीका के गेटवे के तौर पर देखता है। खास बात यह है कि इस देश की 68 फीसदी आबादी भारतीय मूल की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पिछले साल मॉरीशस जा चुके हैं। तब वहां के एगालिगा आइलैंड्स पर समुद्री और हवाई लिंक अपग्रेड करने का अग्रीमेंट हुआ था। इससे पहले दोनों पक्षों के बीच लंबी बातचीत चली थी, लेकिन मॉरीशस इस इलाके को विदेशी ताकत के लिए खोलने पर हिचकिचा रहा था। यहां पर एक हवाई पट्टी थी, जिसे अपग्रेड करने का प्लान बना। माना जाता है कि भारत इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल रणनीतिक तौर पर भी कर सकेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक मॉरिशस और उसके आसपास भारत 32 रेडार स्टेशन और चौकियां भी विकसित कर रहा है।

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