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………कुछ तो बहुत बडा होने वाला है समाजवादी पार्टी में

amar2लखनऊ। राज्यसभा सांसद अमर सिंह अपनी बातों को अक्सर शायराना, लच्छेदार बातों, मुहावरों के साथ कहने के लिए जाने जाते हैं। कई बार वो कुछ नए मुहावरे भी गढ़ डालते हैं तो कई बार कुछ पुरानी चीजों को ही ऐसे मसालेदार तरीके से इस्तेमाल करते हैं उन्हें पढ़ने-सुनने वाले बचना चाहें तो भी बच नहीं पाते। इसी कड़ी में उन्होंने हफ्ते भर पहले एक नया टर्म इस्तेमाल किया था कि – मैं SP का घोषित ‘झंडू बाम’ हूं। अमर सिंह ने जिस वक्त में ये बात कही वो वक्त बड़ा महत्वपूर्ण है। वो बड़े ही व्यथित दिखे और इस बात को कहने से पहले वो समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से भी मिल आए थे। इस मुलाकात से पहले उन्होंने कहा था कि ‘मैं उन्‍हें चोट पहुंचाना नहीं चाहता..लेकिन बेइज्‍जती मेरी सहनशीलता से ऊपर चली गई है। मेरे दिल में बहुत दर्द है’। अमर सिंह ने खुद को झंडू बाम बताने से पहले एक और टर्म का इस्तेमाल किया ज़ीरो बट्टा सन्नाटा।

उनका कहना था कि ‘समाजवादी पार्टी में मेरी हैसियत ज़ीरो बट्टा सन्नाटा है, मैं एसपी की राजनीति का घोषित झंडू बाम हूं’। इन बातों के अलावा उन्होंने तीसरी बात ये कही कि पार्टी में मुलायम सिंह की बात भी नहीं सुनी जाती। यानी अमर सिंह के दिल में जिस बात का सबसे ज्यादा दर्द था वो यही था कि वो हाशिये पर धकेल दिए गए हैं। समाजवादी पार्टी में उनकी कोई हैसियत नहीं, कोई उनकी सुनता नहीं, जबकि एक वक्त वो भी था कि उनकी मर्जी के बिना समाजवादी पार्टी में कुछ होता नहीं था, मुलायम भी उनकी बातों पर आंख मूंद कर भरोसा करते थे और उनका सौ फीसदी पालन होता था। अमर सिंह खुद ही ऐसा कह रहे हैं कि जीरो बटा सन्नाटा, समाजवादी पार्टी में उनकी कोई हैसियत नहीं रह गई है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है? क्या सच में अमर सिंह की कोई हैसियत नहीं है? भला उस अमर सिंह की हैसियत जीरो बटा सन्नाटा कैसे हो सकती है जिसने मुलायम सिंह यादव को पूरे सात साल की सजा से बचा लिया हो।

बाकी लोगों के लिए ये भले ही मामूली लगे, लेकिन मुलायम सिंह तो इसे ताउम्र नहीं भूलेंगे,ऐसा वो खुद भी कह चुके हैं और अमर सिंह की भी यही राय होगी। ये वही अमर सिंह हैं जिनके लिए अखिलेश बाहरी-बाहरी करते रहे और मुलायम ने उन्हें भीतरी बना दिया। वक्त ही सबसे ताकतवर होता है और भला अमर सिंह से बेहतर इसे कौन जानेगा। जो शख्स केंद्र की सरकार बचाने की कूव्वत रखता हो उसे बीमारी की हालत में भी जेल जान पड़े और फिर तमाम विरोधों को दरकिनार करते हुए वो राजनीति में फिर सक्रिय हो जाये तो उसे हल्के में तो आंक नहीं सकते ना ही खारिज कर सकते हैं। अमर सिंह वक्त की कीमत को अच्छी तरह से समझते हैं और उन्होंने ऐसे वक्त में खुद को झंडू बाम बताया जब लग रहा था कि अखिलेश और उनकी टीम की वजह से मुलायम भी उनसे पीछा छुड़ा ही लेना चाहते हैं। उनके इस बयान का असर ये हुआ है कि SP के नेता अचानक ही उनके बचाव में आ खड़े हुए हैं। अमर सिंह के बयान पर वो टीवी बहसों में कहते हैं कि वो SP के महासचिव हैं और राज्य सभा सदस्य हैं फिर झंडू बाम बताने का क्या मतलब है?

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अमर ने खुद को झंडू बाम बताया उसी दौरान उन्होंने पीएम मोदी की जम कर तारीफ करनी भी शुरू कर दी थी। अमर को SP ने राज्यसभा भेजा है, जो कि नोटबंदी के फैसले का विरोध कर रही है, लेकिन अमर नोटबंदी की तारीफ करते नहीं थक रहे। उन्होंने ये तक कहा कि वो नोटबंदी के लिए पीएम मोदी का अभिनंदन करते हैं, उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने लोगों को मौका दिया है कि काले धन से मुक्त हो जाइए। अमर का ये दांव SP को एक तरह से अल्टीमेटम है। झंडू शब्द को आम बोलचाल की भाषा में भले ही नेगेटिव संदर्भ में लिया जाता है, लेकिन याद रखना चाहिए कि ‘झंडू बाम’ एक मशहूर ब्रांड है जो एक साथ कई दर्द को हर लेता है, खुद को ‘झंडू बाम’ कह कर अमर ने समाजवादी पार्टी को याद दिलाया है कि वो पार्टी के सभी ‘दर्द’ दूर करने वाले रहे हैं, लेकिन उनके पास दूसरे रास्ते भी हैं और वो चले गए तो फिर जो ‘दर्द’उठेंगे उसके लिए मरहम कहां से लाओगे।

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