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………तो एक झटके में मोदी के कब्जे में होगा तमिलनाडु !

bjpsनई दिल्ली। दक्षिण भारत की राजनीति नायकों की राजनीति मानी जाती रही है। किसी भी क्षेत्र के नायक आसानी से राजनीति में पैठ बना लेते हैं। अगर सिनेमा के परदे का कोई  महानायक राजनीति में कदम रखे तो ये सोने पर सुहागा जैसी बात हो जाती है। दक्षिण भारत की राजनीति में ऐसे अमेक उदाहरण मिल जाएंगे। जयललिता के निधन के बाद अब इस बात को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं कि अब वहां की राजनीति में कौन नायक उभरेगा। क्या अन्नाद्रमुक सूबे पर अपनी पकड़ बरकरार रख पाएगी। बीजेपी के लिए दक्षिण में कमल खिलाने का एक मौका है। सियासी उठापटक शुरू होने से पहले भाजपा के पास मौका है कि वो दक्षिण भारत की राजनीति में अपनी छाप छोड़ सके। एक नायक की जगह दूसरा नायक खड़ा हो जाए तो जनता उसे आसानी से स्वीकार कर लेती है।

इसी बात के कारण अब एक बार फिर से सुपरस्टार रजनीकांत चर्चा में आते दिख रहे हैं। बीजेपी की स्थानीय यूनिट को रजनीकांत को भगवा रंग में रंगने के लिए उत्साहित दिख रही है। अगर रजनीकांत राजनीति में आने का फैसला करते हैं और वो भाजपा का दामन थामते हैं तो राज्य में पार्टी की पौ बारह हो जाएगी। जिस पार्टी को तमिलनाडु में 3 फीसदी वोट भी नहीं मिले थे वो एक झटके में राज्य की बॉस बन जाएगी। शून्य से शिखर का सफर सुपरस्टार थलाइवा रजनीकांत के सहारे किया जा सकता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या रजनी राजनीति में आएंगे। उनकी सभी सियासी दलों में पहचान है। लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान एक नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात वाली तस्वीरों ने विरोधियों के हौसले पस्त कर दिए थे।

रजनीकांत के लिए पिछले दो साल से बीजेपी की तमिलनाडु यूनिट पड़ी हुई है। वो लगातार कोशिश कर रही है कि किसी तरह से रजनी राजनीति में आएं और कमल थामें। तमिलनाडु की राजनीति में रजनीकांत का कितना प्रभाव है इसके भी उदाहरण हैं। 1996 के विधानसभा चुनाव के दौरान रजनीकांत ने तमिल मनीला कांग्रेस के जीके मूपनार को समर्थन किया था। उस दौरान थलाइवा रजनीकांत ने कहा था कि अगर जयललिता सत्ता में आई तो तमिलनाडु को भगवान भी नहीं बचा पाएंगे। विधानसभा चुनाव के नतीजे जब आए तो कांग्रेस और तमिल मनीला कांग्रेस गठबंधन को प्रचंड बहुमत मिला था। अन्नाद्रमुक 4 सीटों तक सिमट के रह गई थी। जयललिता भी हार गई थी। तब ये कहा गया था कि रजनीकांत के बयान के बाद जनता ने ये काम किया है। ये था राजनीति में रजनीकांत के असर का उदाहरण।

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रजनीकांत और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच की दोस्ती किसी से छुपी नहीं है। लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान जब बीजेपी नेता मोदी चेन्नई पहुंचे तो रजनीकांत से भी मुलाकात की। मोदी जानते हैं कि दक्षिण में चेहरों का कितना महत्व है। वो खुद को रजनीकांत के साथ खड़ा हुआ मुस्कुराते हुए दिखाना चाहते थे। उस मुलाकात के बाद रजनीकांत ने खुद को नरेंद्र मोदी का शुभचिंतक कहा था। नरेंद्र मोदी ने भी रजनीकांत को अपना अच्छा दोस्त बताया था। उसी के बाद से अब तक ये अटकलें लग रही हैं कि रजनीकांत भाजपा का दामन थाम सकते हैं। केंद्र सरकार ने रजनी को पद्म विभूषण से सम्मानित भी किया। अब जयललिता के निधन के बाद भाजपा और रजनीकांत फिर से आमने-सामने खड़े हैं। ऐसे में अगर एक नायक की जगह दूसरा महानायक यानि रजनीकांत जनता के सामने आए तो बीजेपी के लिए तमिलनाडु में कमल खिलाना मुश्किल नहीं होगा।

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