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जब नरेंद्र मोदी ने बचाई थी जयललिता की जिंदगी!

modi-jayalalithaa759लंबी बीमारी के बाद सोमवार देर रात तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता का निधन हो गया। इस मौके पर कोई उन्हें अपने-अपने तरीके से याद कर रहा है। हम आपको बताते हैं 2011 की उस घटना के बारे में जब जयललिता को जान से मारने की कोशिश हुई थी। तब उनको खाने में थोड़ा-थोड़ा जहर दिया जा रहा था। ये महज इत्तेफाक था कि उस साजिश का समय रहते खुलासा हो गया और जयललिता की जान बच गई। ज़हर के असर से तब जयललिता धीरे-धीरे कमजोर होने लग गई थीं। उनकी तबीयत भी अक्सर खराब रहने लगी थी। उन्हीं दिनों तब के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जयललिता से मिलने उनके घर ‘पोएस गार्डन’ में आए थे। मोदी ने तब जयललिता को कुछ ऐसी बातें बताईं जिनके चलते उनकी जान बच पाई।

मुलाकात में मोदी ने जयललिता को बताया कि ‘तमिलनाडु के कई कारोबारी गुजरात में निवेश के लिए पूछताछ कर रहे हैं। क्योंकि आपकी सहयोगी शशिकला नटराजन और उनका परिवार कारोबारियों से अवैध वसूली कर रहा है। जब यह बात जय ललिता को पता चली तो उनके हैरानी का ठिकाना नहीं रहा। उन्हें एक बार को यकीन ही नहीं हुआ कि उनके साथ दोस्त बनकर रहने वाली महिला उनसे इतना बड़ा धोखा कर रही है। न्यूज मैगजीन ‘तहलका’ ने तब जय ललिता के एक करीबी AIADMK नेता के हवाले से यह खुलासा किया था।

बताया जाता है कि मुलाकात के दौरान मोदी ने जयललिता से उनकी गिरती सेहत के बारे में भी बात की थी। मोदी ने नोटिस किया कि उनका चेहरा नीला पड़ता जा रहा है। इस पर उन्होंने सलाह दी कि ‘हो सके तो अपने खान-पान पर नज़र रखिए। आपकी सेहत को लेकर मुझे चिंता हो रही है।’ मोदी से मुलाकात के बाद जयललिता बहुत सतर्क हो गईं। उन्होंने सरकारी ठेकों की फाइलों से लेकर अपने खाने तक पर पहरा बिठा दिया। तब उन्होंने एक डॉक्टर से संपर्क करके अपनी सेहत की जांच करवाई, जिसमें जहर दिए जाने की पुष्टि हुई।

जांच में पता चला कि जयललिता के खाने में वहां नियुक्त नर्स एक धीमा जहर मिला रही थी। ये एक तरह का सेडेटिव केमिकल था। जिसके शरीर में जाने से सुस्ती और नींद आती है। लगातार कई दिनों तक इसे खाने से मौत हो सकती है। यह जहर भी बहुत सोच-समझकर चुना गया था। क्योंकि अगर इससे उनकी मौत हो जाती तो सभी लोग यही समझते कि वो कोई दवा ले रही थीं। आरोपी नर्स को जयललिता की दोस्त शशिकला ने ही नौकरी पर रखा था। पूछताछ में नर्स ने कबूला कि खाने में जहर मिलाने के लिए शशिकला ने ही कहा था।

यह दावा भी किया जाता है कि शशिकला अपने पति नटराजन को मुख्यमंत्री बनवाने के लिए जयललिता को मारना चाहती थी। खुलासे के बाद जयललिता ने दिसंबर 2011 में शशिकला और उसके पूरे परिवार को अपने घर और पार्टी से निकाल दिया। हालांकि उन्होंने अपनी इस बेहद करीबी दोस्त के खिलाफ कोई एफआईआर तक नहीं दर्ज कराई। घर से निकालने के सिर्फ सौ दिन के अंदर ही शशिकला की पोएस गार्डन में वापसी भी हो गई। बताते हैं कि शशिकला ने मिलकर माफी मांग ली और जयललिता ने उन्हें माफ भी कर दिया। इसके बाद शशिकला का वो सियासी रुतबा तो नहीं रहा, लेकिन वो अब भी जय ललिता की करीबी बनी रहीं। आखिरी वक्त में अस्पताल में भी में शशिकला के अलावा कुछ गिने-चुने लोग ही उनके साथ थे।

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तस्वीर में जयललिता के पीछे खड़ी महिला शशिकला नटराजन है।

वैसे नरेंद्र मोदी या खुद जयललिता ने इस वाकये के बारे में कभी कोई बयान नहीं दिया। जो कुछ भी जानकारी सामने आई वो AIADMK पार्टी के अंदरूनी लोगों के हवाले से मीडिया में छपी खबरें थीं। हालांकि इसका असर यह हुआ कि मोदी और जयललिता के संबंध राजनीति से बढ़कर हो गए। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद जब मोदी प्रधानमंत्री बने तो जयललिता ने अपने सांसदों से कह दिया था कि वो संसद में ऐसा कुछ न करें जिससे नरेंद्र मोदी सरकार के लिए दिक्कत पैदा होती हो। तमिलनाडु और देश से जुड़े तमाम मुद्दों पर दोनों नेता हमेशा सीधे संपर्क में रहा करते थे। जिसका नतीजा हुआ कि केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच कभी टकराव की स्थिति पैदा नहीं हुई।

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