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आखिरी खत में सूरज ने कबूली गलतियां

surajठाणे। बिल्डर सूरज परमार सूइसाइड मामले में जहां 4 कॉर्पोरेटर पिछले दो महीने से जेल में हैं, वहीं 20 पन्नों के अपने सूइसाइड नोट में सूरज ने इस बात को स्वीकारा है कि उसने कुछ बड़ी गलतियां की हैं। उसने अपने पार्टनरों को अंधेरे में रखा पावर ऑफ अटॉर्नी का गलत इस्तेमाल किया।

परमार ने लिखा है कि उसे खुद पता नहीं है कि उसकी यह गलतियां मूर्खतापूर्ण थीं या वह बहुत चतुर था। उसने लिखा था कि पिछले दो-तीन सालों में उसने कई बड़ी गलतियां की थीं। उसने कभी कायदे-कानून का ठीक से अध्ययन नहीं किया था और न ही उसके वकीलों ने उसे उचित सलाह दी थी।

सूइसाइड नोट में यह भी है कि सूरज ने अपने पार्टनरों को अंधेरे में रखा और उनके द्वारा दी गई पावर आफ अटार्नी का गलत इस्तेमाल किया। साथ ही यह भी कबूला है कि टाइटल क्लियर नहीं होने के बावजूद उसने भिवंडी, पुणे और काव्या नामक प्रॉजेक्ट के लिए प्लॉट खरीदा था। सूरज परमार ने अपने पार्टनरों और घर के लोगों के नाम पर लिखे नोट में कॉसमॉस ग्रुप में हुए मिस मैनेजमेंट के लिए खुद को जिम्मेदार माना है।

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पार्टनरों ने किया भरोसा

बुधवार को पुलिस ने ठाणे कोर्ट में जो चार्जशीट दायर की है और उसके साथ जो सूइसाइड नोट संलग्न किया है, उसमें उल्लेख है कि सूरज के परिवार के लोगों ने और उसके पार्टनरों ने उस पर बहुत भरोसा किया था, लेकिन उसने गलतियों पर गलतियां कीं। वह अपने काम को ठीक तरह से नहीं संभाल पाया और कंपनी और परिवार का भविष्य दांव पर लगा दिया। उसने लिखा कि मैं शर्मिंदगी महसूस कर रहा हूं। सूरज ने अपनी पत्नी को संबोधित करते हुए लिखा है कि बच्चों को बताना कि उसके पिता चीटर नहीं थे।

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