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अमेरिकी डॉक्टर ने केजरीवाल से चंदा वापस मांगा!

munish-raizada-kejriwalनई दिल्ली। आम आदमी पार्टी को चंदा भेजने वाले एक अमेरिकी डॉक्टर ने अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर अपने पूरे पैसे लौटाने को कहा है। डॉक्टर मुनीष रायजादा शिकागो में रहते हैं और अमेरिका में नवजात बच्चों के मशहूर चिकित्सक हैं। जब आम आदमी पार्टी बनी थी तो डॉक्टर रायजादा ने अमेरिका में एनआरआई विंग की स्थापना की थी। पिछले साल नवंबर में मुनीष रायजादा ने अपनी वेबसाइट पर लालू यादव के खिलाफ एक लेख लिखा था जिसके बाद अरविंद केजरीवाल ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाल दिया था।

डॉक्टर मुनीष रायजादा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भेजी चिट्ठी में मांग की है कि 26 नवंबर को पार्टी की स्थापना दिवस के मौके पर वो चंदे का ब्यौरा सार्वजनिक करें। रायजादा ने लिखा है कि “मैं और मेरे जैसे कई समर्थक पार्टी को चंदा भेजते रहे, लेकिन इस साल जून से पार्टी ने चंदे की ऑनलाइन लिस्ट वेबसाइट से हटा ली है। क्या यह इत्तेफाक था कि इनकम टैक्स विभाग की पूछताछ के बाद ही ऐसा किया गया। क्योंकि वेबसाइट पर डाली गई डोनेशन की जानकारी चुनाव आयोग के रिकॉर्ड से मैच नहीं करती। इस बारे में पार्टी को अब तक तीन नोटिस आ चुके हैं।” डॉक्टर रायजादा ने पार्टी के उसूलों से हटने का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने लिखा है कि “पार्टी बनाते वक्त कहा गया था कि हम ईमानदारी के लिए चुनावी राजनीति में उतर रहे हैं। फंडिंग में पारदर्शिता हमारे लिए बुनियादी चीज थी। मेरे जैसे तमाम लोगों ने अपना करियर और कामधंधा छोड़कर पार्टी को अपना कीमती वक्त दिया। लेकिन इन सभी के साथ धोखा हुआ।”

मुनीष रायजादा ने पार्टी में रहने के दौरान अपने प्रभाव का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी को विदेशों से चंदा दिलाने के लिए किया। उनके कहने पर सैकड़ों लोगों ने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा पार्टी को डोनेट किया ताकि देश में एक कथित ईमानदार पार्टी अपने पैरों पर खड़ी हो सके। रायजादा ने कहा है कि केजरीवाल चंदे का हिसाब दें, वरना वो लोग सत्याग्रह को मजबूर होंगे। उनके इस अभियान को अमेरिका में रह रहे भारतीयों का भी भरपूर समर्थन है।

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वैसे अमेरिका और यूरोप से चंदा कम होने के बाद अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी आजकल पाकिस्तान और खाड़ी के देशों पर ज्यादा निर्भर हैं। ऐसी खबर है कि उन्हें पाकिस्तान से लाखों-करोड़ों मिलते हैं, लेकिन इस पैसे को वो यूरोप या खाड़ी देशों से आया हुआ बताते हैं। इस बारे में हमारी रिपोर्ट को आप नीचे लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

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