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तीन दशक बाद गोरखपुर संसदीय सीट को मिलेगी गोरक्षपीठ से मुक्ति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री जल्द ही अपनी लोकसभा सीट छोड़ देंगे। क्योंकि इन्हें छह महीने के अंदर राज्य के विधानमंडल की सदस्यता लेनी होगी। माना जा रहा है की राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित होते ही ये अपनी सीट छोड़ देंगे। करीब तीन दशक बाद ऐसा पहली बार होगा जब गोरखपुर संसदीय सीट पर किसी ऐसे नेता का कब्जा होगा जो गोरक्षपीठ से संबंधित नहीं होगा। इस सीट को जीतने के लिए विपक्षी दलों ने तमाम रणनीति अपनाई, लेकिन कभी उनकी चाल सफल नहीं हो पाई है।
वर्ष 1989 से गोरखपुर संसदीय सीट पर गोरक्ष पीठ का कब्जा रहा है। योगी के गुरू ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ इस सीट से 1989, 91 व 96 में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 1998 से योगी भारतीय जनता पार्टी के बैनर से लगातार सांसद चुने जाते रहे हैं। गोरखपुर की इस सीट पर महंत अवैद्यनाथ के गुरु महंत दिग्विजय नाथ (1967-70) भी सांसद रह चुके हैं।
योगी तोड़ेंगे परंपरा, जाएंगे विधानसभा!
उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ के लिए भी विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। पिछले दो मुख्यमंत्रियों (मायावती, अखिलेश यादव) की बात करें तो उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता लेना उचित समझा था। माना जा रहा है कि लगातार लोकसभा के सदस्य चुने जाते रहे योगी आदित्यनाथ इस परंपरा को तोड़कर विधानसभा में जाना पसंद करेंगे। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह किस सीट से चुनाव लड़ेंगे।
भारतीय जनता पार्टी के विधायक कई विधायक योगी आदित्यनाथ के लिए अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के बेटे फतेह बहादुर सिंह ने गोरखपुर की कंपीयरगंज सीट उनके लिए छोड़ने का प्रस्ताव दिया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि योगी आदित्यनाथ सहजवनां सीट (विधायक शीतल पांडेय) से चुनाव लड़ सकते हैं। इसके अलावा योगी आदित्यनाथ गोरखपुर ग्रामीण से विधायक विपिन सिंह की सीट से भी चुनाव लड़ सकते हैं।
पांच मंत्रियों को बनना है MLA-MLC
फूलपुर से भाजपा सांसद और अब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य इलाहाबाद के सराथू से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। इस सीट पर केशव प्रसाद मौर्य दो साल के लिए विधायक रह चुके हैं। योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के अलावा यूपी के उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री मोहसिन रजा को राज्य के विधानमंडल की सदस्यता लेनी होगी। इन सभी के पास विकल्प होगा कि वो चाहें तो विधानसभा का उप-चुनाव लड़ें या फिर एमएलसी (विधान परिषद सदस्य) चुने जाएं।
कौन होगा गोरखपुर से भाजपा सांसद?
देखना दिलचस्प होगा कि गोरखपुर सीट से अगला भाजपा सांसद कौन होगा? चर्चाएं गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल और पूर्व एमएलसी और पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वाईडी सिंह ने नाम को लेकर हैं। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के बेटे और कभी मायावती के दाहिने हाथ माने जाने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री फतेह बहादुर सिंह का आता है। इसके अलावा सहजनवां विधायक शीतल पांडेय का नाम भी चर्चा में है।